http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_9052486.html
Only after last tree is cut down. The last of the water drop is poisoned. The last animal destroyed. Only then will you realize, you can't eat money............. Indian Prophecy
Sunday, March 25, 2012
यत्र नारी पूज्यन्ते
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_9052486.html
Monday, March 19, 2012
विद्या दर्शन
हम: उस स्कूल में आप ही हैं?
एक: हाँ, आप कौन?
हम: प्रिंसिपल कहाँ बैठते हैं (अंदाज लगाते हुए कि वो इनसे अलग होंगे).
दूसरी: आते ही होंगे, मिड डे मील के लिए सामन खरीदवाने गए हैं.
हम: (सोचते हुए कि ये काम भी प्रिंसिपल का है क्या!) कितनी देर में आयेंगे? बाकी टीचर नहीं दिख रहे !!
एक: आज नहीं आयेंगे, बीएसए के साथ मीटिंग पे जाने वाले हैं. आप को क्या काम है?
दूसरी: आप को क्या लगता है हम... (सम्हलते हुए) हम ही हैं टीचर, बोलिए
हम: शिक्षा मित्र भी तो होंगे? क्या वो नहीं आते? उनके नाम बताइए जरा सा, मैं इलाहाबाद से आया हूँ , सभी स्कूलों का एक जैसा हाल है, मेरा आइडेन्टिटी कार्ड देखेंगी (सफ़ेद झूठ, आज का गेटप काम करता दिखा).
पहली: जी हम लोग ही तो शिक्षा मित्र हैं.
हम: मैं स्कूल के अटेंडेंस रजिस्टर देखना चाहता हूँ. इतने कम बच्चे स्कूल में क्यों हैं? (दोनों एक दूसरे का मुंह देखती हैं)
वो:...........
हम: मैं बीएसए से मिलकर ही आ रहा हूँ, क्या उन्हें भी बुला लूं ? प्रिंसिपल को फ़ोन करके बुलाइए अभी....
एक सुर में: जी वो, वो बीमार हैं कुछ दिनों से इसलिए आते नहीं.
हम: स्कूल रजिस्टर.... (दोनों चल देती हैं).
हम: रजिस्टर में तो कुछ २०० बच्चे हैं और लगभग सभी उपस्थित हैं फिर स्कूल में २०-३० ही क्यूँ दिख रहे हैं बाकी बच्चे कहाँ हैं?
दूसरी: आये थे सभी... कुछ चले गए.
हम: कुछ चले गए? १५० बच्चे ११ बजे चले गए? पढ़ा रही हैं मुझे, रोज ऐसा ही होता है?
दोनों:.......
हम: ये रुक्मिणी कौन हैं? और इनकी हफ्ते भर की आगे की अटेंडेंस क्यों लगी है? और ये रोहित साहब १५ दिन पहले आये थे? झूठ नहीं इस बार...
पहली: (घबराते हुए) जी, रुक्मिणी मैडम की शादी हो गयी है पिछले साल और वो कानपुर में रहती हैं. इसलिए..
हम: और ये रोहित...
दूसरी: जी वो इलाहाबाद से आते हैं, तैयारी कर रहे हैं इसलिए कम ही आते हैं.
हम: यानी वो ३० दिन में आते हैं और आगे पीछे का अटेंडेंस लगा के जाते हैं.
दोनों:........
हम: आज आप लोगों ने क्या पढाया है?
दोनों:..........
मैं एक शिकायत पत्र तैयार करता हूँ और दोनों के हस्ताक्षर ले क्रिकेट मैदान की ओर बढ़ जाता हूँ. दूसरी घबराई हुई, शायद, प्रिंसिपल को फ़ोन करती है...
Saturday, March 10, 2012
होली
बेरंग रंगा राम का जीवन, युग बीते होली सिमटे न।
Sunday, February 26, 2012
Sunday, February 19, 2012
साधारण यात्रा
Friday, February 3, 2012
Tuesday, January 17, 2012
गाँधी, क्या से क्या हो गया देखते देखते
Friday, December 23, 2011
Journey throgh Life
Thursday, December 22, 2011
मुझे भी भारत रत्न दो
आजादी के बाद के इतिहास में शायद ये पहला पहला मौका होगा जब भारत रत्न सम्मान पर इतनी चर्चा सुनने में आती है. शायद ही कोई सप्ताह ऐसा छूटता होगा जिसमे इस चर्चा से भेंट न होती हो. पंडित से लेकर निरक्षर तक भारत रत्न के विषय में बेबाकी से अपने विचार रखता मिल जाएगा. प्रारंभ में बहुत अच्छा लगा था कि देर से ही सही देश का आम आदमी इन मामलों को लेकर भी जागरूक हो रहा है. अब सिर्फ चंद लोग फैसला नहीं लेंगे कि किसे ये सम्मान मिलाना चाहिए और किसे नहीं, एक बयार चलेगी जो हर दिल को छू कर निकलेगी और कहेगी कि ये है वो इंसान जिसने राष्ट्र के विकास में गंभीर योगदान दिया है, बस अब घोषणा कर दो. वैश्विक द्रष्टिकोण से मालूम नहीं किन्तु विश्व की १/६ आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले इस सम्मान का महत्व स्वयं सिद्ध है.
Ram
Tuesday, December 13, 2011
From "History" page of Landau Institute for Theoretical Physics
Sunday, December 11, 2011
मूलभूत शिक्षा
रूस में रक्त क्रांति (प्रारंभ १९०५) से भी पूर्व जो अध्यापक बच्चों को किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना देते थे उनके लिए साइबेरिया भेजने तक की कठोर सजा दी जाती थी, ऐसे अध्यापक की लोक समाज में प्रखर आलोचना होती थी और उन्हें घ्रणा की द्रष्टि से देखा जाता था. महाभारत काल में भी शिष्यों की पिटाई पर मृत्यु दंड के प्रावधान का उल्लेख है. लेकिन हमारे यहाँ पहले दिन की सुरुआत समझावन लाल से ही होती है. हर कक्ष में अध्यापक वजह-बेवजह बच्चों के स्वाभिमान की ऐसी तैसी करते मिल जायेंगे. घर परिवार से सम्बंधित झुंझलाहट भी अक्सर यहीं निकलती है. समझ गयी तेल बेचने, बच्चों ने पाठ नहीं याद किया या गुरु जी अनुत्तरित हैं पिटेंगे क्षात्र. हर समस्या का समाधान डंडे से होता है. जो जितना गरीब है उतना ज्यादा पिटेगा. घर में भी हालत विपरीत नहीं होते, बड़े नुकसान करें या बच्चे आफत बच्चों के सर फूटनी है. बच्चों के आत्म सम्मान (watch Brothers Karamazov) को मिट्टी में मिलाने का काम परिजन बड़ी जिम्मेदारी से निभाते हैं. अपने पराये का ज्ञान सर्वप्रथम बच्चों को माँ ही देती है.
नतीजतन ५वीं गुजरते गुजरते अधिकांश बच्चों का शिक्षा से लगाव मर चुका होता है. आगे बढ़ना भी चाहें तो उनकी नींव में राख और गौरव में भूसा भरा होता है. घर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव आगे चलकर धन के प्रति अप्रतिम लगाव और मानवीय असहिष्णुता की पहली सीढ़ी का निर्माण करता है, ये कहना आप को भी यहाँ असमसामयिक लगेगा.
Monday, October 24, 2011
अथ शोध यात्रा
मित्र प्रगतिशील है इसलिए शोध क्षात्र से सच्ची सहानुभूतिपूर्ण भारी गले से अगले महीने के मुहूर्त में शादी का निमंत्रण दे फ़ोन रख देता है। उसे मालूम है कि चाह कर भी ये ५०० किमी दूर उसकी शादी में शामिल होने नहीं आने वाला। सुबह के सात बज चुके हैं, शोध क्षात्र ऊंघते हुए कंप्यूटर पर "job submit" कर दहेज़ (कु)प्रथा को कोसता हुआ बिस्तर का रुख करता है।
जारी...
Saturday, October 8, 2011
८४ हजार जीरो, वाह रे युवा....
Monday, September 26, 2011
रेलम पेल से त्रस्त? केरल से सीखो
कोच्चि। देश की आबादी नियंत्रित करने के लिए क्या यह उपाय सही होगा? केरल में यदि किसी पति ने पत्नी को तीसरे बच्चे के लिए गर्भवती किया, तो उसे जेल की हवा खाना पड़ सकती है! राज्य सरकार इसे लागू करेगी या नहीं, यह बाद में तय होगा, लेकिन केरल महिला संहिता विधेयक 2011 में कुछ ऐसा ही प्रावधान किया गया है। इसे न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री को सौंपा है।
कमिशन ऑन राइट्स एंड वेलफेयर ऑफ वुमेन एंड चिल्ड्रन के मुताबिक तीसरे बच्चे की संभावना के तहत पिता पर न्यूनतम दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा या तीन महीने की साधारण जेल होगी। साथ ही सरकारी सुविधाएं और फायदे अभिभावकों को नहीं दिए जाएंगे। हालांकि बच्चों को किसी प्रकार के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा। आयोग ने कहा है कि नया प्रस्ताव बच्चों के बेहतर लालन-पालन के लिए प्रभावी होगा।
आयोग ने 19 साल की उम्र में शादी करने और बीस वर्ष की उम्र में मां बनने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर पांच हजार रुपए देने का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षित गर्भपात मुफ्त किया जाना चाहिए।
आयोग ने कहा है कि किसी को भी धर्म या राजनीति की आड़ में 'जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम' में छूट नहीं दी गई है। धर्म, क्षेत्र, जाति या किसी अन्य आधार पर किसी व्यक्ति को ज्यादा बच्चे रखने का अधिकार नहीं है। आयोग का गठन राज्य सरकार द्वारा सात अगस्त 2010 को किया गया था। जिसमें महिलाओं और बच्चों के अधिकार और दायित्व संहिता तैयार करने को कहा गया था।
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थोड़ी समझ परिणाम बड़ा, भारत सरकार के काम की चीज नहीं, वो अभी स्पेक्ट्रम बाँट रही और खेल दिखा रही है। राम को जेल की हवा और रावण को मलाई(जनता का खून) खिला रही है।
Friday, September 23, 2011
तराजू
इतिहास ने खुद को फिर से दोहराया, इस बार मेरा पलड़ा हल्का था.......
