http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_9052486.html
Only after last tree is cut down. The last of the water drop is poisoned. The last animal destroyed. Only then will you realize, you can't eat money............. Indian Prophecy
Sunday, March 25, 2012
यत्र नारी पूज्यन्ते
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_9052486.html
Saturday, October 8, 2011
८४ हजार जीरो, वाह रे युवा....
Monday, September 26, 2011
रेलम पेल से त्रस्त? केरल से सीखो
कोच्चि। देश की आबादी नियंत्रित करने के लिए क्या यह उपाय सही होगा? केरल में यदि किसी पति ने पत्नी को तीसरे बच्चे के लिए गर्भवती किया, तो उसे जेल की हवा खाना पड़ सकती है! राज्य सरकार इसे लागू करेगी या नहीं, यह बाद में तय होगा, लेकिन केरल महिला संहिता विधेयक 2011 में कुछ ऐसा ही प्रावधान किया गया है। इसे न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री को सौंपा है।
कमिशन ऑन राइट्स एंड वेलफेयर ऑफ वुमेन एंड चिल्ड्रन के मुताबिक तीसरे बच्चे की संभावना के तहत पिता पर न्यूनतम दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा या तीन महीने की साधारण जेल होगी। साथ ही सरकारी सुविधाएं और फायदे अभिभावकों को नहीं दिए जाएंगे। हालांकि बच्चों को किसी प्रकार के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा। आयोग ने कहा है कि नया प्रस्ताव बच्चों के बेहतर लालन-पालन के लिए प्रभावी होगा।
आयोग ने 19 साल की उम्र में शादी करने और बीस वर्ष की उम्र में मां बनने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर पांच हजार रुपए देने का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षित गर्भपात मुफ्त किया जाना चाहिए।
आयोग ने कहा है कि किसी को भी धर्म या राजनीति की आड़ में 'जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम' में छूट नहीं दी गई है। धर्म, क्षेत्र, जाति या किसी अन्य आधार पर किसी व्यक्ति को ज्यादा बच्चे रखने का अधिकार नहीं है। आयोग का गठन राज्य सरकार द्वारा सात अगस्त 2010 को किया गया था। जिसमें महिलाओं और बच्चों के अधिकार और दायित्व संहिता तैयार करने को कहा गया था।
************************************************************
थोड़ी समझ परिणाम बड़ा, भारत सरकार के काम की चीज नहीं, वो अभी स्पेक्ट्रम बाँट रही और खेल दिखा रही है। राम को जेल की हवा और रावण को मलाई(जनता का खून) खिला रही है।
Monday, April 11, 2011
मासूम बचपन पर गिद्धों की निगाह (दैनिक जागरण)
कानपुर, प्रतिनिधि : बच्चों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मासूम बचपन पर इन 'गिद्धों' ने इस तरह निगाह गड़ा रखी है कि बच्चे स्कूल से घर तक, कहीं भी महफूज नहीं हैं।
नगर में वहशीपन की शिकार दिव्या, नीलम, वंदना, आकांक्षा, किरन, प्रीती जैसी लड़कियों की फेहरिस्त तो लंबी होती जा रही है। इसके साथ ही मासूमों का भी बचपन शहर में खतरे से खाली नहीं रह गया है। सितंबर 2010 में स्कूल में दिव्या संग हुआ अमानवीय कृत्या लोग शायद ही भूल सकेंगे। मासूम संग स्कूल में हुए दुष्कर्म के बाद उसकी छोटी बहन में इतनी दहशत है कि उसने स्कूल से ही मुंह फेर लिया। नवंबर में बर्रा में एक ट्यूशन पढ़ाने वाले वहशी ने मानव अंग पढ़ाने के नाम पर मासूम को शिकार बनाने की कोशिश की। 2011 जनवरी में चकेरी के एक स्कूल में गेम्स टीचर ने प्रयोगात्मक परीक्षा के नाम पर स्कूल में छुंट्टी के दिन बुलाकर गलत काम किया। इसी दिन नौबस्ता में एक डांस टीचर ने कक्षा तीन के मासूम को कई दिनों तक हवस का शिकार बनाया। अप्रैल में कार सवार दरिंदों ने 12 साल की मासूम को अगवा कर अपनी हवस मिटाई। इसी तरह बिबियापुर में कक्षा एक की बच्ची संग दुष्कर्म हुआ। इन सभी घटनाओं में शिकार मासूमों को हवस का शिकार बनाने वाले उन पर काफी समय से निगाह बनाये हुए थे।
शाबाश इंडिया :(